तथ्यों को छुपाकर दूसरी बार शिकायत करना कोर्ट से धोखाधड़ी, MP हाईकोर्ट ने केस किया निरस्त
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तथ्यों को छुपाकर दूसरी बार शिकायत करना कोर्ट से धोखाधड़ी, MP हाईकोर्ट ने केस किया निरस्त

Published on: 05-Feb-2026

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि तथ्यों को छुपाना न्यायालय से धोखाधडी के समान हैइसके बाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त के निर्देश जारी किए गए.


जबलपुर।

याचिकाकर्ता विकास मोदी  अरविंद जैन की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह मैसर्स वैशाली बिल्डर्स एंड डेवलपर्स में साझेदार हैंसुनील ताम्रकार भी उनकी कंपनी में साझेदार थाउन्होंने टीकमगढ़ में वैशाली रेजीडेंसी नाम परियोजना प्रारंभ की थीपरियोजना के तहत उन्हें आवासीय डुप्लेक्स बनाना थासुनील ताम्रकार उपद्रव कर परियोजना की प्रगति में बाधा डाल रहा थाजिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस में की थीपुलिस ने उसके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किया था.


पहली बार कोर्ट में सिविल केस लगाया
इसके बाद सभी साझेदारों ने सुनील ताम्रकार को फर्म की साझेदारी से हटाने के लिए न्यायालय में सिविल परिवाद दायर कियाइस पर सुनील ने उनके खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर कर दियासुनील ने उक्त परिवाद स्वेच्छा से वापस ले लिया थाजिसके कारण न्यायालय ने परिवाद को खारिज कर दिया थाइसके बाद सुनील ने उन्हीं तथ्यों  शिकायत के साथ दूसरा परिवाद दायर कर दियासुनील ने दूसरी शिकायत में पहले दायर किये गये परिवाद तथा उसे वापस लेने का उल्लेख नहीं किया था.


हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया
ट्रायल कोर्ट ने परिवाद की सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने के आदेश पारित कर दियेयाचिका में दर्ज की गयी एफआईआर खारिज किये जाने की राहत चाही गयी थीएकलपीठ ने सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी शिकायत पर असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई की जाती हैयाचिकाकर्ता को दूसरी शिकायत करने का कानूनी हक हैइस मामले में याचिकाकर्ता ने तथ्यों को छुपाकर दूसरी शिकायत पेश की थी.


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